सुण के जीवों की पुकार
सुण के जीवों की पुकार, लैके नाम दा जहाज।
सतलोक से आया है साहिब जादूगर ।
जाने से पहले कह गए साहिब कबीर।
छ: सदी बाद उतरा शब्द अतीत।
होगा जम्मू दीप स्थान, देखन आऊ कुल जहान। सतलोक से........
धरती ते आके जदों पैर उस धरिया।
बादल बरस पड़े होआ हरा भरिया।
महकी फूलों से बहार, चढ़िया पंछीआं खुमार। सतलोक से........
मायूस होये चेहरियाँ ते नूर बरसा गया।
लगा सारे आलम दा राखा कोई आ गया।
निगाहों से मंतर मार, देवे सबदा सीना ठार। सतलोक से.......
साहिब आया साहिब आया, जग रौला पै गिया।
आत्माओं का सोदागर, धरती ते आ गया।
जो वस्तू उसके पास, करदी भव सागर ते पार। सतलोक से.......
सत्य दा झंडा चुक जग ते फरहाया ऐ।
हर कोई बैरी होया मारन नूं आया ऐ।
कोई कुल्ले जलाण, कोई ज़हर पलाण। सतलोक से........