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Sahibji आरती 2

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Lyrics​

जय सतगुरु देवा, साहिब जय सतगुरु देवा।
सब कुछ तुम पर अर्पण, करहूँ पद सेवा ॥
जय सतगुरु.......

जय गुरुदेव दयानिधि, दीनन हितकारी, साहिब भक्तन हितकारी
जय जय मोह विनाशक, जय जय तिमिर विनाशक, भव बंधनहारी।
जय सतगुरु.......

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव, गुरु मूरत धारी, साहिब प्रभु मूरत धारी
वेद पुराण बखानत, शास्त्र पुराण बखानत, गुरु महिमा भारी।
जय सतगुरु.......

जप तप तीर्थ संयम, दान विविध दीन्हें, साहिब, दान विविध/बहुत दीन्हें
गुरु बिन ज्ञान न होवे, दाता बिन ज्ञान न होवे, कोटि यत्न कीन्हें।
जय सतगुरु.......

माया मोह नदी जल, जीव बहे सारे, साहिब जीव बहे सारे
नाम जहाज बिठाकर, शब्द जहाज चढ़ाकार, गुरु पल में तारे।
जय सतगुरु.......

काम, क्रोध, मद, लोभ, चोर बड़े भारे, साहिब चोर बड़े/बहुत भारे,
ज्ञान खड़ग दे कर में, शब्द खड़ग दे कर में, गुर सब संहारे।
जय सतगुरु.......

नाना पंथ जगत में, निज-निज गुण गावें, साहिब न्यारे न्यारे यश गावें,
सब का सार बताकर, सच का भेद लखा कर, गुरु मार्ग लावें।
जय सतगुरु.......

गुरु चरणामृत निर्मल, सब पातक हारी, साहिब सब दोषक हारी,
वचन सुनत तम नासे, शब्द सुनत भ्रम नासे, सब संशय टारी।
जय सतगुरु.......

तन, मन धन सब अर्पण, गुरु चरणन कीजै, साहिब दाता अर्पण कीजै,
सदगुरु देव परमपद, सदगुरु देव अचलपद, मोक्ष गति लीजै।
जय सतगुरु.......

जय सतगुरु देवा, साहिब जय सतगुरु देवा।
सब कुछ तुम पर अर्पण, करहूँ पद सेवा ॥